News in Hindi(हिन्दी में समाचार), Hindi News(हिंदी समाचार) देश के सबसे विश्वसनीय अख़बार पर पढ़ें ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी, ब्रेकिंग न्यूज़ इन हिंदी,हिंदी न्यूज़, ब्रेकिंग न्यूज़ ऑफ़ टुडे, हिंदी में आज की खबर सुर्खियों में, हिंदी समाचार, न्यूज़ २४, हिंदी न्यूज़ वीडियो, हिंदी लाइव,छत्तीसगढ़ी न्यूज़,लोकल न्यूज़ हिंदी

Breaking

Whatsapp link

Monday, July 27, 2020

बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने धान, चावल और लौकी के बीज से बनाई अनोखी राखी, कुछ इस प्रकार से हैं..

बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने धान, चावल और लौकी के बीज से बनाई अनोखी राखी, कुछ इस प्रकार से हैं..


हमरNews: इस बार दुकानों में चाइनीज राखियां गायब है, इनकी जगह अब स्वदेशी राखियों ने ले ली है। इसके साथ ही जिले की ही महिलाओं द्वारा बीज से तैयार किए राखियां भाईयों के कलाई पर सजेगी, भाई-बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन का त्योहार 3 अगस्त को मनाया जाएगा। देश में बढ़ते कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए बिहान महिला स्व सहायता समूहों द्वारा धान, चावल, गेंहू और लौकी के बीज से बनी आकर्षक राखियां तैयार की गई हैं।


सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए आकर्षक राखियों के दाम 10 से 40 रुपए तक रखी गई है। 

राखियों के आकर्षक पैकेट भी तैयार की गई है। इस पैकेट में कोरोना वायरस के बचाव को ध्यान में रखते हुए भाईयों के लिए राखी के साथ-साथ हैण्ड सैनिटाईजर, मास्क, रूमाल, पीला चावल और मुंह मीठा करने के लिए चॉकलेट की भी पैकेजिंग की गई है। इसका मूल्य 110 से 150 रुपए तक गया है।


बोड़ला, पंडरिया, सहसपुर लोहारा और कवर्धा विकासखंड बिहान के 6 से अधिक महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार की गई स्वदेशी राखी की मांग बढ़ती जा रही है। महिला समूह के इस कार्य को देखते हुए कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा और जिला पंचायत सीईओ विजय दयाराम के ने जिला कार्यालय में लगाए गए समूहों के राखी स्टॉल पर पहुंचकर स्वदेशी राखी की खरीदारी भी की।

बड़ी मात्रा में राखियां तैयार की जिले के बोड़ला विकासखंड की जय गंगा मैया महिला स्व सहायता
समूह राजानवागांव, आंचल महिला स्व सहायता समूह, पोडी, पंडरिया के वैष्णव देवी महिला स्व सहायता समूह पेण्ड्री खुर्द, लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह ग्राम मैनपुरा के साथ ही कवर्धा और सहसपुर लोहारा के महिला स्व सहायता समूहों द्वारा रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में स्वदेशी राखियां तैयार की गई है।

समूहों द्वारा इससे पहले होली पर्व पर हर्बल गुलाल तैयार किया गया था। समूहों ने डेढ़ लाख रुपए से अधिक का हर्बल गुलाल बेंचकर आय का एक नया स्त्रोत तैयार किया है।
हमरNews

No comments:

Post a Comment