हमरNews:
बिलासपुर,
तोरवा छठ घाट मुक्तिधाम में गुरुवार को अंतिम संस्कार के लिए शवों को लाया गया तो एक बार फिर से स्थानीय लोग विरोध पर उतर आए। हलांकि हो-हंगामे के बाद भी अंतिम संस्कार वहीं पर किया गया। दरअसल कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन ने तोरवा मुक्तिधाम को चिन्हित किया है।स्थानीय पार्षद मोतीराम गंगवानी और स्थानीय नागरिकों ने शुरू से ही इसका विरोध किया है।
पार्षद मोतीराम गंगवानी ने बताया 13 अगस्त को सामान्य सभा की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था और तब सर्वसम्मति से शहर के बाहर ऐसे शवों के दाह संस्कार की बात कही गई थी, लेकिन 13 दिन बीत जाने के बाद भी इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई और अब भी बेरोकटोक तोरवा मुक्तिधाम में संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वहीं इसी श्मशान घाट का उपयोग अन्य लोग भी कर रहे हैं जिनके संक्रमित होने की आशंका है।साथ ही आसपास झोपड़ी बनाकर रहने वालों के भी पुनर्वास की बात कही गई थी, इस मुद्दे पर भी अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है । बस्ती के बीच मौजूद श्मशान घाट का उपयोग कोविड-19 पेशेंट के लिए किए जाने का विरोध किया जारी है। बावजूद इसके प्रशासनिक प्रभाव से संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार गुरुवार को भी किया गया।
यहाँ संक्रमित शवों के दाह संस्कार नहीं करने देगे
इस मुद्दे पर स्थानीय नागरिकों ने शहर के सभी समाजसेवी संस्थाओं को एक मंच पर आकर विरोध करने की बता कह रहें है। पार्षद का दावा है कि कलेक्टर ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि यहां केवल छह शवों का ही अंतिम संस्कार किया जाएगा जो आंकड़ा बढ़कर 9 तक जा पहुंचा है, लेकिन फिर भी अन्यंत्र कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
इसलिए बार-बार स्थानीय लोगों को इस तरह विरोध करना पड़ रहा है।
एक तरफ जहा शव लेकर पहुंचे प्रशासनिक अमले को स्थानीय नागरिक और पार्षद के विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने अब कहा है कि भविष्य में यहंा संक्रमित शवों का दाह संस्कार नहीं करने देंगे।हमरNews


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