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देश में गाड़ी चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) का होना बेहद जरूरी है, लेकिन कई बार दूसरे देशों में घूमने जाने या अस्थायी रूप से रहने के दौरान ड्राइव करने के लिए उस देश का ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी होता है।
इसी के चलते लोग अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट (International Driving Permit) बनवाते हैं।
मगर हाल ही में कुछ ऐसी शिकायतें मिलीं जिनमें दूसरे मुल्कों में भारतीय लाइसेंस को स्वीकार नहीं किया जा रहा था। ऐसे में सरकार ने इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट के नियमों में कुछ फेरबदल किया है। इससे लोगों को सहूलियत होगी।सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके द्वारा जारी किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट (आईडीपी) पर थोड़ा संशोधन करने को कहा है। इसके तहत अब अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट जारी करते समय पहले पन्ने पर प्रमाणिकता की मुहर लगाने को कहा गया है।
इससे दूसरे देशों में वेरिफाई करने में आसानी होगी।
क्या है आईडीपी (IDP) अगर आप विदेश में घूमने या फिर वहां नौकरी के लिए जाते हैं, तो आपको इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट को आईडीपी कहते हैं। हर देश में इसके लिए अलग नियम है। कई देशों में इसकी जरूरत नहीं होती है, वहीं कई जगह ये अनिवार्य है।
ब्रिटेन और इंग्लैंड में भारतीय अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस मान्य है।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स, क्वींसलैंड में भारतीय लाइसेंस का इस्तेमाल तीन महीने तक किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए आपका ड्राइविंग लाइसेंस अंग्रेजी में होना चाहिए। वहीं न्यूजीलैंड, फ्रांस और नॉर्वे में भी भारतीय लाइसेंस के जरिए आप सड़कों पर रफ्तार भर सकते हैं।
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