हमरNews:
चक्रधर नगर थाना क्षेत्र स्थित केलो बिहार कालोनी में दाे सगे भाइयों की लाश फंदे में लटकी मिली। घटना स्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें दोनों भाइयों ने स्वेच्छा से आत्महत्या करने की बात लिखी है और परिवार के किसी सदस्य को जिम्मेदार न ठहराने के लिए कहा है।
दोनों भाई मूल रूप से तमनार के बांधपाली के रहने वाले हैं।
2004 से केलो बिहार में ही मां के साथ रह रहे थे। परिजन के अनुसार छोटा भाई का मानसिक संतुलन ठीक नहीं थी। इससे बड़ा भाई परेशान था। खुदकुशी से एक दिन पहले उसने अपनी पत्नी मां को गांव भेज दिया था।
तमनार थाना क्षेत्र के बांधपाली निवासी श्याम कुमार चौधरी के पुत्र अविनाश चौधरी(32)और हरेकृष्ण चौधरी(25) दो दिन पहले बिलासपुर से रायगढ़ के केलो बिहार स्थित अपने निजी मकान में लौटे थे।
शनिवार सुबह जब घरवालों ने उन्हें फोन किया तो दोनों भाइयों के फोन बंद मिले।
दोपहर तक संपर्क न होने पर चचेरा भाई नरेंद्र चौधरी केलो बिहार आया तो घर का मेन दरवाजा अंदर से बंद मिला। जब वह पास खड़े पेड़ पर चढ़कर अंदर देखा तो दोनों भाइयों के शव फांसी पर लटक रहे थे।
घटना की जानकारी उसने चक्रधर नगर पुलिस को दी। बिस्तर के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें दोनों भाइयों ने अपनी मर्जी से आत्महत्या करने की बात लिखी है और परिवार को किसी भी तरह से परेशान न करने का जिक्र किया है।
अविनाश JPL में मैकेनिकल इंजीनियर
पुलिस ने बताया कि अविनाश चौधरी जेपीएल तमनार में मैकेनिकल इंजीनियर है, उसके पिता श्याम कुमार चौधरी उद्योग विभाग में है। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग बिलासपुर में है। घटना स्थल पर पहुंचे चचेरे भाई नरेंद्र चौधरी के अनुसार कि छोटे भाई हरेकृष्ण चौधरी ने भी इंजीनियरिंग की है पर उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। इससे अविनाश अक्सर परेशान रहता था।
चार माह पहले हुई थी अविनाश की शादी
चार माह पहले 29 जून काे अविनाश की शादी ईश्वरी चाैधरी से हुई थी। शादी के बाद से हंसी खुशी एक साथ रह रहे थे। अविनाश के ऊपर अपने भाई की देखरेख के साथ मां चंपा चाैधरी की देखरेख की जिम्मेदारी थी। गांव बांधापाली आने जाने के साथ ही वे रायगढ़ के केलाेबिहार कालाेनी में रहते थे। छोटा भाई को बड़े भाई से अलग रहना मंजूर नहीं था। इसलिए वह साथ रहता था।
2 दिन पहले इलाज कराने गया था बिलासपुर
अविनाश अपने भाई हरेकृष्ण(बीटेक इंजीनियर) की मानसिक हालत ठीक नहीं हाेने पर गुरुवार काे बिलासपुर इलाज के लिए गया था। हरे कृष्णा काे इलाज के लिए वह रांची भी लेकर आता-जाता रहा है। इससे वह परेशान रहता था।
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