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Tuesday, August 12, 2025

रायपुर: पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, फिर भी नगर निगम के पास डेटा नहीं

रायपुर: पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, फिर भी नगर निगम के पास डेटा नहीं


रायपुर: राजधानी रायपुर में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन नगर निगम के नियमों के अनुसार अनिवार्य किया गया है, लेकिन हैरानी की बात है कि निगम के पास अब तक इसका कोई सटीक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर है।




रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य

नगर निगम द्वारा पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड रखना ही नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु कल्याण और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इससे:

  • कुत्तों की सही पहचान संभव होती है।
  • रेबीज और अन्य बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
  • आवारा कुत्तों की समस्या कम करने में मदद मिलती है।
  • शहर में पालतू जानवरों की संख्या का सही आकलन हो पाता है।





वर्तमान स्थिति

रायपुर नगर निगम का दावा है कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान बनाई है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई पालतू कुत्तों के मालिक रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं और निगम भी सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहा। अनुमान है कि रायपुर में हजारों पालतू कुत्ते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 10% से भी कम है।





रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया

  • आवेदन फॉर्म भरना — कुत्ते की नस्ल, उम्र, लिंग और वैक्सीनेशन की जानकारी देना।
  • रेबीज वैक्सीनेशन का प्रमाणपत्र जमा करना।
  • निर्धारित शुल्क का भुगतान करना।
  • नगर निगम से रजिस्ट्रेशन कार्ड प्राप्त करना।




मुख्य समस्याएँ

  • डेटा की कमी: निगम के पास न तो डिजिटल डेटा है और न ही फिजिकल रिकॉर्ड व्यवस्थित है।
  • जागरूकता की कमी: बहुत से लोग इस नियम से अनजान हैं।
  • ऑनलाइन सुविधा का अभाव: पोर्टल या मोबाइल ऐप न होने से प्रक्रिया धीमी है।
  • कानूनी प्रवर्तन कमजोर: जुर्माना या दंड का प्रावधान होते हुए भी उसका पालन नहीं हो रहा।




रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है?

  1. सुरक्षा — कुत्ता खो जाने या घटना में शामिल होने पर मालिक की पहचान।
  2. स्वास्थ्य — टीकाकरण रिकॉर्ड बनाए रखना।
  3. शहरी योजना — पालतू जानवरों की संख्या और उनकी देखरेख के लिए योजनाएं बनाना।
  4. प्रजनन नियंत्रण — अनियंत्रित ब्रीडिंग रोकने में मदद।




विशेषज्ञों की राय

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि रजिस्ट्रेशन के अभाव में न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि पशु कल्याण के प्रयास भी कमजोर पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि:

  • ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप की शुरुआत की जाए।
  • जागरूकता अभियान चलाया जाए।
  • रजिस्ट्रेशन न कराने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए।
  • नियमित वैक्सीनेशन और स्पे/न्यूटर कैंप लगाए जाएं।





अन्य शहरों से तुलना

दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में पालतू जानवरों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। वहां नगर निगम द्वारा मोबाइल ऐप और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा दी जाती है, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तेज और आसान हो जाती है। रायपुर में भी इसी तरह की पहल आवश्यक है।




नागरिकों के लिए सुझाव

  • अपने पालतू कुत्ते का जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाएं।
  • टीकाकरण समय पर कराएं और प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें।
  • नियमों के बारे में आस-पास के लोगों को जागरूक करें।
  • कुत्ते को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाते समय जिम्मेदारी से व्यवहार करें।


पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और शहरी प्रबंधन का एक अहम हिस्सा है। रायपुर नगर निगम को इस दिशा में ठोस कदम उठाकर रजिस्ट्रेशन की दर बढ़ानी होगी और नागरिकों को भी इस जिम्मेदारी में सहयोग देना होगा।




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