हमरNews:
खरसिया,
संक्रमण के भय और प्रशासनिक चूक ने रविवार को ऐसा वाकया निर्मित कर दिया, जिसे नगरवासी सालों साल भुला नहीं पाएंगे। Covid-19 पॉजिटिव शव के अग्नि संस्कार के लिए परिजन देर रात तक भटकते रहे। स्थानीय मुक्तिधाम को चयनित करने के प्रशासनिक निर्णय पर परिजनों को वार्ड वासियों के मुखर विरोध का सामना करना पड़ा।ऐसे में देर रात प्रशासनिक निर्देश पर ग्राम बाम्हनपाली एरिया में द्वारा शव-दाह तो किया गया, परंतु सोमवार की सुबह अधजला शव देखकर ग्रामवासियों ने एनएच पर चक्का जाम कर दिया। वहीं प्रशासनिक मान मुनव्वल पर बड़ी मुश्किल से ग्रामवासियों ने जाम खोला।
मरने के बाद भी नहीं मिला चैन
बताया जा रहा है कि खरसिया निवासी श्यामलाल की रायगढ़ के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो जाने पर, वहीं कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव बताए जाने के बाद दोपहर को नगर लौटे परिजनों को प्रशासन द्वारा स्थानीय मुक्तिधाम में अग्नि संस्कार के निर्देश दिए गए। परंतु वार्ड नंबर 14 के निवासियों ने यहां शव दाह को लेकर जबरदस्त विरोध किया।
ऐसे में मृत पिता को लेकर परिजन देर रात तक भटकते रहे।
वहीं बड़ी मुश्किल से प्रशासन इस निर्णय पर पहुंचा कि ग्राम बाम्हनपाली के करीब पहाड़ के किनारे शव दाह किया जाए। वहीं रात करीब 1:00 बजे परिजन और प्रशासन, शव को अधजला छोड़ कर लौट आए। ऐसे में मृत व्यक्ति को मरने के बाद भी देर तक चैन नहीं मिल पाया। वहीं सोमवार की सुबह बाम्हनपाली के निवासियों ने आक्रोशित होकर एनएच पर चक्का जाम कर दिया।
अड़ियल प्रशासन को करनी पड़ी मान मुनव्वल
बाम्हनपाली चौक पर आक्रोशित ग्राम वासियों ने चक्का जाम करते हुए बताया कि प्रशासन द्वारा प्रत्येक कोविड-19 पॉजिटिव शव के अग्निसंस्कार के लिए इसी स्थान को निर्धारित किया गया। वहीं अधजले शव को छोड़ दिया गया। ऐसे में पूरे गांव में संक्रमण फैलने का अंदेशा है। चक्का जाम कर प्रशासन के अड़ियल रवैए का विरोध किया जा रहा है। वहीं स्थानीय प्रशासन के गांव तथा स्थान विशेष को सैनिटाइज करने एवं दोबारा यहां शवदाह ना करने की बात पर लगभग 4 घंटों के चक्का जाम को खोला गया।
स्थानीय मुक्तिधाम पालिका प्रशासन के अंतर्गत है।
वहीं नगर भर के लोगों द्वारा यहां दाह संस्कार किया जाता है। परंतु कोविड-19 पॉजिटिव के शव को जलाने के लिए कुछ दिनों पहले और फिर सोमवार को मृतक के परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जीवन और मृत्यु का क्रम तो प्रत्येक शहर और गांव में बना हुआ है, ऐसे में नगर निवासियों को ही यहां शव दाह में कठिनाई आएगी तो वे कहां जाएंगे ?अन्य गांव द्वारा विरोध करना लाजिमी भी है।
जागरूक जनता को बेवजह के भय का त्याग करना चाहिए तथा प्रशासन को दाह संस्कार के बाद मुक्तिधाम में सैनिटाइज की सुविधा भी देनी के बाद मुक्तिधाम में सैनिटाइज की सुविधा भी देनी चाहिए। ताकि मानवीय संवेदनाएं तार-तार होने से बच सकें।हमरNews


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