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Wednesday, October 7, 2020

बड़ी खबर: फिर आ रहा है एक और ग्रहण, जानें तारीख, सूतक काल का समय और आप पर असर

बड़ी खबर: फिर आ रहा है एक और ग्रहण, जानें तारीख, सूतक काल का समय और आप पर असर


हमरNews:

ग्रहण से पहले चंद्रमा, पृथ्वी की परछाईं में प्रवेश करता है, जिसे उपच्छाया कहते हैं। इसके बाद ही चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तब वास्तविक ग्रहण होता है। लेकिन, कई बार चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया में जाए बिना, उसकी उपच्छाया से ही बाहर निकल आता है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर केवल उसकी उपछाया मात्र ही पड़ती है, तब उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है। इसमें चंद्रमा के आकार में कोई अंतर नहीं आता है, इसमें केवल चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है।

चंद्र ग्रहण की धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है, इसी कारण से जब भी चंद्रमा पर ग्रहण लगता है तो इसका सीधा असर मन पर होता है। चंद्र ग्रहण का असर उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जिनकी कुंडली में चंद्र पीड़ित हो या उनकी कुंडली में चंद्र ग्रहण दोष बन रहा है। इतना ही नहीं चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पानी को अपनी ओर आकर्षित भी करता है, जिससे समुद्र में बड़ी -बड़ी लहरें काफी ऊचांई तक उठने लगती है। माना जाता है कि चंद्रमा को ग्रहण के समय अत्याधिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है, इसी कारण से चंद्र ग्रहण के समय हवन, यज्ञ, और मंत्र जाप आदि किए जाते हैं।


चंद्र ग्रहण 2020 ये बरतें यह सावधानियां 

ग्रहण के दौरान कोई भी नया काम शुरु न करें। 

  • : चंद्र ग्रहण के शुरु होने से पहले खाने की सामग्री में तुलसी के पत्ते डालें और तुलसी के पेड़ को ग्रहण के दौरान न छुएं। 
  • : चंद्र ग्रहण के दौरान धार्मिक और प्रेरणादायक पुस्तकों को पढ़ना चाहिए, इनको पढ़ने से आपके अंदर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी। इसके साथ ही मंत्रों के जाप करने से भी ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है। 
  • : ग्रहण के दौरान खाना न बनाएं और खाना खाने से भी बचें। खाना बनाना और खाना दोनों को ही ग्रहण के दौरान अशुभ माना जाता है। 
  • : ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को तेज धारदार औजारों जैसे चाकू, कैंची और छुरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इससे शीशु के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • इस समय देवी देवताओं की मूर्ति और तस्वीरों को भी नहीं छूना चाहिए। 
  • : ग्रहण के दौरान दांतून करने, बालों पर कंघी लगाने और मलमूत्र का त्याग करने से भी बचना चाहिए। 
  • : ग्रहण की समाप्ति के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
  •  : ग्रहण समाप्ति के बाद यदि आप जरुरतमंदों को जरुरी चीजें दान करते हैं, तो माना जाता है कि इससे आपको अच्छे फलों की प्राप्ति होती है। 
  • : ग्रहण के दौरान : “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” मंत्र का जाप करें। 
  • : इस समय चंद्र देव की पूजा करें और ध्यान लगाने की कोशिश करें।


वहीं माना जाता है कि अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो इसकी वजह से शारीरिक विकास में कमी आती है और ऐसे इंसान का मन चंचल रहता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन्हें किसी जानकार की सलाह पर ही मोती रत्न धारण करना चाहिए। माना जाता है कि यदि आप अपने चंद्रमा को मजबूत कर लें तो आपको लाभकारी परिणामों की प्राप्ति होती है।


इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने चक्र से स्वर भानु के धड़ को सिर से अलग कर दिया। 

हालांकि तब तक अमृत की कुछ बूंदें उसके गले में चली गईं थीं, जिसके कारण स्वरभानु मरा नहीं। तब से स्वर भानु के सिर वाले भाग को राहु और धड़ को केतु के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि, सूर्य और चंद्र देव ने राहु-केतु यानि स्वरभानु का भेद भगवान विष्णु को बताया था इसलिये शत्रुतावश राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के इन दोनों को ग्रहण लगाकर शापित करते हैं। इस दौरान केतु चंद्र का व राहु सूर्य का ग्रास करते हैं।

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