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Saturday, August 16, 2025

बस्तर के 29 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा – आज़ादी का नया सवेरा

बस्तर के 29 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा – आज़ादी का नया सवेरा


बस्तर, छत्तीसगढ़: 15 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इतिहास रच दिया गया। इस स्वतंत्रता दिवस पर 29 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। दशकों से नक्सल आतंक और डर के साए में जी रहे इन गांवों ने आजादी के 78 साल बाद पहली बार खुलेआम स्वतंत्रता दिवस मनाया।




इतिहासिक पल का गवाह बना बस्तर

बस्तर और आसपास के क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चित रहे हैं। इन गांवों में नक्सलियों के डर से प्रशासन भी ठीक से प्रवेश नहीं कर पाता था। लेकिन इस बार राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों के चलते गांवों में शांति बहाल हुई और लोगों ने गर्व से तिरंगा फहराया।





गांव वालों का जोश और उत्साह

इन गांवों के लोगों ने परंपरागत वेशभूषा पहनकर आजादी का पर्व मनाया। बच्चे हाथों में तिरंगा लहराते दिखे, महिलाएं स्वतंत्रता गीत गा रही थीं और पुरुष ढोल-नगाड़ों पर नाचते नज़र आए। यह नजारा न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।





सरकार और सुरक्षा बलों की भूमिका

राज्य सरकार और सुरक्षा बलों ने मिलकर बीते कुछ वर्षों में लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्य शुरू किए। सड़कों का निर्माण, शिक्षा संस्थान खोलना और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाना – इन प्रयासों से लोगों का भरोसा वापस लौटा। यही वजह रही कि पहली बार इन गांवों में तिरंगा शान से फहराया गया।





मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे "लोकतंत्र और विकास की जीत" बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग अब डर के साए से निकलकर शांति और विकास की ओर बढ़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार (15 अगस्त) को बताया है कि पिछले 20 महीनों में सुरक्षाबलों ने 450 नक्सलियों को ढेर कर दिया है और 1,578 को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान 1,589 नक्सलियों ने पुलिस या सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया है।

नक्सलवादी हिंसा की घटनाओं में भी बीते वर्षों में भारी कमी आई है। 2010 में नक्सली हिंसा की 1,936 घटनाएँ हुई थीं। 2024 में यह संख्या 81% की कमी के साथ 374 रह गई है। इसके अलावा इस दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या में भी 85% की कमी हुई है। यह संख्या 2010 में 1,005 से घटकर 2024 में 150 रह गई है।

2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की कुल 16,463 घटनाएँ हुईं जबकि 2014 से 2024 के दौरान हिंसक घटनाओं की संख्या में 53% की कमी आई है और यह संख्या घटकर 7,744 रह गई है।

विकास की राह पर नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र
नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्र अब विकास के रास्ते पर बढ़ रहे हैं और मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। सरकार ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के विस्तार के लिए सड़क आवश्यकता योजना (RRP) और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) जैसी योजनाएँ शुरू की गई हैं।


नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से 2014-15 से 8,640 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। साथ ही, कौशल विकास के लिए 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और 49 कौशल विकास केंद्र (SDC) खोले गए हैं। इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में बहेतर शिक्षा के उद्देश्य से 179 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) बनाए गए हैं।

डाक विभाग ने नक्सलवाद से प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5,899 डाकघर खोले हैं। नक्सलवाद से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में 1,007 बैंक शाखाएँ और 937 एटीएम खोले गए हैं। 2017 के बाद से नक्सलवाद प्रभावित जिलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत 3,769.44 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।



आगे की राह

सरकार का दावा है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी नक्सल प्रभावित इलाकों से माओवादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी ताकि लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें।




बस्तर में 29 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराना केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद की अंधेरी सुरंग से बाहर निकलकर विकास और शांति की रोशनी की ओर बढ़ रहा है।





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