बस्तर, छत्तीसगढ़: 15 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इतिहास रच दिया गया। इस स्वतंत्रता दिवस पर 29 नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। दशकों से नक्सल आतंक और डर के साए में जी रहे इन गांवों ने आजादी के 78 साल बाद पहली बार खुलेआम स्वतंत्रता दिवस मनाया।
इतिहासिक पल का गवाह बना बस्तर
बस्तर और आसपास के क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चित रहे हैं। इन गांवों में नक्सलियों के डर से प्रशासन भी ठीक से प्रवेश नहीं कर पाता था। लेकिन इस बार राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों के चलते गांवों में शांति बहाल हुई और लोगों ने गर्व से तिरंगा फहराया।
गांव वालों का जोश और उत्साह
इन गांवों के लोगों ने परंपरागत वेशभूषा पहनकर आजादी का पर्व मनाया। बच्चे हाथों में तिरंगा लहराते दिखे, महिलाएं स्वतंत्रता गीत गा रही थीं और पुरुष ढोल-नगाड़ों पर नाचते नज़र आए। यह नजारा न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।
सरकार और सुरक्षा बलों की भूमिका
राज्य सरकार और सुरक्षा बलों ने मिलकर बीते कुछ वर्षों में लगातार नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्य शुरू किए। सड़कों का निर्माण, शिक्षा संस्थान खोलना और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाना – इन प्रयासों से लोगों का भरोसा वापस लौटा। यही वजह रही कि पहली बार इन गांवों में तिरंगा शान से फहराया गया।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे "लोकतंत्र और विकास की जीत" बताया। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग अब डर के साए से निकलकर शांति और विकास की ओर बढ़ रहे हैं।
आगे की राह
सरकार का दावा है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी नक्सल प्रभावित इलाकों से माओवादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी ताकि लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें।
बस्तर में 29 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराना केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद की अंधेरी सुरंग से बाहर निकलकर विकास और शांति की रोशनी की ओर बढ़ रहा है।


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